Badaun Jama Masjid Controversy: ज्ञानवापी के बाद अब उत्तर प्रदेश में इस जामा मस्जिद पर पड़ी हिन्दुत्ववादियों की नज़र, जानिये अब किस जामा मस्जिद को बताया शिव मन्दिर

Badaun Jama Masjid Controversy: ज्ञानवापी के बाद अब उत्तर प्रदेश में इस जामा मस्जिद पर पड़ी हिन्दुत्ववादियों की नज़र, पढ़िये किस जामा मस्जिद को बताया शिव मन्दिर

बदायूँ: Badaun Jama Masjid Controversy-
यूपी के वाराणसी में अभी तक ज्ञानवापी मस्जिद का मामला ठंडा भी नहीं हुआ था कि अब उत्तर प्रदेश के ही बदायूँ में स्थित प्राचीन जामा मस्जिद को अखिल भारतीय हिन्दू महासभा द्वारा नीलकंठ महादेव के मन्दिर होने का दावा किया जाने लगा।

ज़िला अदालत ने शुक्रवार यानी 3 सितम्बर को अखिल भारतीय हिंदू महासभा द्वारा दाख़िल की गयी याचिका पर सुनवाई की। दरअसल अखिल भारतीय हिंदू महासभा ने यह दावा किया था कि “बदायूँ जामा मस्जिद परिसर में भगवान नीलकंठ महादेव का एक प्राचीन मन्दिर है।” (Badaun Jama Masjid Controversy)

बता दें की यूपी के बदायूँ में मौलवी टोला क्षेत्र में स्थित यह जामा मस्जिद भारत की सब से बड़ी और प्राचीन मस्जिदों में से एक है। बताया जाता है कि यह मस्जिद इतनी बड़ी है कि यहाँ एक साथ लगभग 23000 या अधिक संख्या में लोग एकत्रित हो सकते हैं अथवा एक साथ नमाज़ पढ़ सकते हैं।

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अखिल भारतीय हिन्दू महासभा द्वारा सिविल कोर्ट में डाली गयी याचिका में यह दावा किया है कि “जिस स्थान पर बदायूँ में जमा मस्जिद है, वहाँ पर पहले कभी एक हिन्दू राजा का किला हुआ करता था। और इस किले के भीतर नीलकंठ महादेव का मन्दिर था। और कभी उसी प्राचीन मन्दिर को तोड़कर यह जामा मस्जिद बनायी गयी है। (Badaun Jama Masjid Controversy)

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार सिविल कोर्ट ने अखिल भारतीय हिंदू महासभा द्वारा डाली गयी याचिका के सुनवायी के बाद तुरन्त मामला दर्ज करने का आदेश दे दिया। हिन्दू महासभा के ज़िलाध्यक्ष मुकेश सिंह पटेल का कहना है कि “हमें पता है कि पहले वहाँ (जामा मस्जिद स्थान) पर मन्दिर था, और हमारे पास इसके पुख़्ता सबूत भी हैं।” (Badaun Jama Masjid Controversy)

अखिल भारतीय हिंदू महासभा के ज़िलाध्यक्ष का कहना है कि “मन्दिर के बारे में जो भी लेख लिखे गये हैं, वे सब दस्तावेज़ जामा मस्जिद के एक कमरे में बहुत लम्बे समय से बन्द हैं। मीडिया रिपोर्ट्स अनुसार हिन्दू महासभा के याचिकाकर्ताओं का कहना है कि “इस मस्जिद को शमशुद्दीन इल्तुतमिश ने सन-1222 ई० में बनाया था, और यह बात इतिहास के किताबों में भी दर्ज है।” (Badaun Jama Masjid Controversy)

इस सम्बंध में सिविल कोर्ट ने जामा मस्जिद प्रबंधन कमेटी, उउत्तर प्रदेश सुन्नी वक़्फ़ बोर्ड, उत्तर प्रदेश पुरातत्व विभाग यूनियन ऑफ इण्डिया, सरकार सरकार, राज्य के मुख्य सचिव और बदायूँ ज़िलाधिकारी से भी इस प्रकरण पर अपना जवाब दाख़िल करने को कहा है। सिविल को अब मामले की अगली सुनवाई 15 सितम्बर को करेगी। (Badaun Jama Masjid Controversy)
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Author: Desh Duniya Today [Farhad Pundir]