Bilkis Rape Case: बिलकिस बानो सामूहिक दुष्कर्म के दोषियों को जेल से छोड़े जाने को अमेरिकी संस्था ‘अन्तर्राष्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता आयोग’ ने बताया न्याय के साथ मज़ाक

Bilkis Rape Case: बिलकिस बानो सामूहिक दुष्कर्म के दोषियों को जेल से छोड़े जाने को अमेरिकी संस्था ‘अन्तर्राष्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता आयोग’ ने बताया न्याय के साथ मज़ाक

वाशिंगटन: Bilkis Rape Case-
अमेरिका के ‘अन्तर्राष्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता आयोग’ (USCIRF) ने हाल ही में गुजरात दंगों के दौरान हुए बिलकिस बानो सामूहिक दुष्कर्म काण्ड और उसके परिजनों के हत्याकाण्ड के 11 दोषियों की समय से पहले जेल से रिहा किये जाने पर कड़ी नाराज़गी जतायी है। ‘अन्तर्राष्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता आयोग’ ने कहा कि उम्रक़ैद की सज़ा पाये हुए दोषियों की समय से पूर्व रिहाई अपने आप में अनुचित और न्याय का मज़ाक है।

‘अन्तर्राष्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता आयोग’ के उपाध्यक्ष अब्राहम कूपर ने इस मुद्दे पर एक बयान जारी कर सरकार द्वारा दोषियों की रिहाई के इस निर्णय की निन्दा की है। इस मुद्दे पर ‘अन्तर्राष्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता आयोग’ के आयुक्त स्टीफ़न श्नेक ने कहा कि “यह निर्णय धार्मिक अल्पसंख्यकों के विरुद्ध हिंसा में सम्मिलित दोषियों को सज़ा से मुक्त करने के एक पैटर्न का हिस्सा है।” (Bilkis Rape Case)

विदित हो कि वर्ष-2002 में हुए गोधरा काण्ड के बाद गुजरात में भड़के दंगों के दौरान एक मुस्लिम गर्भवती महिला बिलकिस बानो के साथ सामूहिक दुष्कर्म करने के साथ साथ उसकी 5 वर्षीय बेटी सहित उसके परिवार के 13 सदस्यों की हत्या कर दी गयी थी, जो कि अपने आप में एक दुर्लभ और बड़ा जघन्य अपराध था।

इस मामले में मुम्बई की विशेष CBI की विशेष अदालत ने 11 आरोपियों को वर्ष-2008 में हत्यायें और सामूहिक दुष्कर्म का दोषी क़रार देते हुए उम्रक़ैद की सज़ा सुनायी गयी थी। जिन्हें सरकार ने इस वर्ष आज़ादी की 75-वीं वर्षगाँठ के अवसर पर रिहाई का अमृत उपहार दिया है। (Bilkis Rape Case)

वहीं बिलकिस बानो सामुहिक दुष्कर्म के दोषियों की रिहायी के निर्णय लेने के ख़िलाफ़ गुजरात सरकार की अब देश के अलावा पूरे विश्व में कड़ी आलोचना हो रही है। बता दें कि उम्र के सज़ा याफ़्ता क़ैदियों की रिहायी का यह निर्णय गुजरात राज्य सरकार की 1992 की क़ैदियों की जल्दी रिहाई नीति के अन्तर्गत लिया गया है।

लेकिन देश के क़ानून के जानकारों का मानना है कि हत्याओं और सामूहिक दुष्कर्म के दोषियों को रिहायी की संशोधित नीति के तहत भी जेल से नहीं छोड़ा जा सकता है। क्योंकि यह संशोधित नीति वर्ष-2008 से लागू हुई थी और उसी समय इन दोषियों को सज़ा सुनायी गयी थी। (Bilkis Rape Case)
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Author: Desh Duniya Today [Farhad Pundir]