Deoband News: जिन लोगों का देश की आज़ादी में रत्तीभर भी योगदान नहीं, वे आज हमें देशद्रोही बता रहें हैं- ‘मौलाना अरशद मदनी’

Deoband News: जिन लोगों का देश की आज़ादी में रत्तीभर भी योगदान नहीं, वे आज हमें देशद्रोही बता रहें हैं- मौलाना अरशद मदनी

देवबन्द: Deoband News-
दारुल उलूम देवबन्द में भी आज देश का 75 वां स्वतंत्रता दिवस बड़े धूमधाम से मनाया गया। जमीयत उलेमा उलेमा ए हिन्द के अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी ने झंडारोहण किया। इस अवसर पर आयोजित ‘जश्न-ए-आज़ादी समारोह’ में बोलते हुए मौलाना अरशद मदनी ने देश की जंग-ए-आज़ादी में उलमाओं और मुसलमानों के महत्वपूर्ण योगदान के बारे में विस्तारपूर्वक चर्चा की।

मौलाना अरशद मदनी ने कहा कि “जिन लोगों का देश की आज़ादी में रत्तीभर भी योगदान नही है, आज वह लोग देश के लिये अपनी जान देने वाले मुसलमानों को देशद्रोही बता रहे हैं।” मौलाना अरशद मदनी ने कहा कि “जिस वक़्त किसी के अन्दर अंग्रेज़ों के ख़िलाफ़ मुँह खोलने की हिम्मत भी नहीं थी, उस वक़्त उलेमाओं ने इस देश की आज़ादी का बिगुल बजाया था।”उन्होंने कहा कि “जब तक शहीद टीपू सुल्तान रहे, उस वक़्त तक अंग्रेज़ों के अन्दर हिन्दुस्तान पर अपना अधिकार जताने की हिम्मत भी नहीं हुई थी।”

मौलाना अरशद मदनी ने कहा कि “शाह अब्दुल अज़ीज़ देहलवी ने सब से पहले देश की आज़ादी के लिये अंग्रेज़ों के ख़िलाफ़ जेहाद का फ़तवा जारी किया था। इसके बाद अंग्रेज़ों ने शाह अब्दुल अज़ीज़ देहलवी पर बड़े ज़ुल्म किये, लेकिन वह अपने मिशन से पीछे नहीं हटे थे।” Deoband News)

उन्होंने कहा कि “आज़ादी की लड़ाई असल में 1831 से शुरू हुई थी, सन 1857 तक मुसलमानों और उलेमाओं ने यह लड़ाई लड़ी, लेकिन सन 1857 की नाकामी के बाद उलेमाओं ने 1866 ई. में दारुल उलूम देवबन्द की स्थापना का फ़ैसला किया और सभी देशवासियों से आपस में मिलकर आज़ादी की लड़ाई लड़ने की अपील की थी। इसके बाद यह कारवां आगे बढ़ा और हिन्दू, मुसलमान सिख सभी ने मिलकर इस देश की आज़ादी की लड़ाई में भागीदारी की थी।” (Deoband News)
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Author: Desh Duniya Today [Farhad Pundir]