मछली बेचने वाले व्यक्ति की ईमानदारी देखिये, 3 साल बाद मालिक को खोजकर किया नोटों का बैग वापस- Honest Fisherman,News In Hindi

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पश्चिम बंगाल : 25 अप्रैल-2022
Honest Fisherman,News In Hindi- एक ओर जहाँ इस दौर में सौ-दो सौ रुपये के ऊपर ही किसी की जान ले लेने जैसी अमानवीय घटनायें देखने को मिलती हैं वहीं कुछ लोग ऐसे भी ईमानदार होते हैं जो किसी की पायी हुई रक़म को लौटने के लिये दिन रात उसके मालिक की खोज में रहते हैं। यही नहीं खुद पर कितनी भी आर्थिक दिक्कत आये लेकिन वे किसी की पायी हुई धन रूपी अमानत में ख़यानत नहीं करते। (Honest Fisherman,News In Hindi)

कौन है यह ईमानदार व्यक्ति?
ऐसे ही एक व्यक्ति की ईमानदारी की मिसाल सामने आयी है पश्चिम बंगाल के 24 परगना के बशीरहाट से। दरअसल बशीरहाट निवासी एक मछली बेचने वाले एक व्यक्ति मोहम्मद अबू क़ासिम ग़ाज़ी को अब से 3 साल पहले सड़क पर रुपयों से भरा एक बैग मिला था जिसे उन्होंने अपने पास इस विश्वास पर संभाल कर रख लिया कि एक दिन उस बैग का असली मालिक उन्हें ज़रूर मिलेगा और वह उसे इस बैग को लौटा देगा। और यक़ीनन हुआ भी ऐसा ही। (Honest Fisherman,News In Hindi)

किसका खोया था यह बैग?
जानकारी के अनुसार बशीरहाट में डांडेरहाट के नगेंद्र कुमार नाम के एक टीचर चम्पक नन्दी का लगभग 3 साल पहले एक नोटों से भरा बैग बाज़ार में कहीं खो गया था जो बहुत खोजबीन के बाद भी नहीं मिल पाया था। आख़िर थक हारकर चम्पक नन्दी ने अपने रूपयों के बैग की उम्मीद ही यह सोचकर छोड़ दी थी कि अब बैग कभी वापस नहीं मिलेगा। और इन तीन सालों में वे इस घटना को लगभग भूल ही चुके थे।

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बैग का मालिक भले ही अपने बैग को भूल गया लेकिन मछली बेचने वाले मोहम्मद अबू क़ासिम ग़ाज़ी इस घटना को नहीं भूले। अबु क़ासिम ग़ाज़ी बताते हैं कि “उस दिन बाज़ार में बड़ी भीड़ थी। उन्होंने देखा कि उनकी दुकान के पास कोई अपना बैग छोड़कर चला गया है। जब कई दिनों तक काफ़ी खोजबीन के बाद भी उसे कोई बैग का असली वारिस नहीं मिला तो अबू क़ासिम ग़ाज़ी ने उस बैग को अपने पास संभाल कर रख लिया। (Honest Fisherman,News In Hindi)

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लॉकडाउन की आर्थिक विपत्ति में बैग को हाथ नहीं लगाया।
कुछ समय बाद जब अबू क़ासिम ग़ाज़ी ने इस बैग को खोलकर देखा तो बैग में 70 हज़ार रुपये की नक़दी रखी हुई थी। उन्होंने यह बैग अपनी पत्नी को संभालकर रखने की बात कहते हुए दे दिया। हालांकि लॉकडाउन के दौरान भी औरों की तरह अबू क़ासिम ग़ाज़ी का काम धंधा भी बन्द पड़ा हुआ था तब भी इस ईमानदार व्यक्ति ने उन पैसों को ख़र्च करना तो दूर की बात इन्होंने उसे हाथ तक भी नहीं लगाया।

बैग का मालिक कौन है, कैसे पता चला?
एक दिन जब अबू क़ासिम ग़ाज़ी और उसकी पत्नी के दिमाग़ में ख़्याल आया कि कई साल हो गये अभी तक भी बैग का वारिस नहीं मिला तो उन्होंने इस रक़म को मस्जिद में दान करने की बात सोचते हुए जब दोबारा उस बैग को खोलकर अच्छे से देखा तो उस में एक स्टेशनरी की दुकान का एक कैश मेमो मिला। और वे बिना किसी देरी किये उस नोटों के बैग को लेकर उस दुकान पर पहुँच गये। यहाँ पता चला कि यह बैग चम्पक नन्दी नाम के उसी टीचर का है जिसकी यह स्टेशनरी की दुकान है। (Honest Fisherman,News In Hindi)

तीन साल के लम्बे अन्तराल के बाद अपने खोये हुए पैसे मिलने पर चम्पक नन्दी बहुत ख़ुश हुए। और उस बैग में एक रुपया भी कम नहीं था। हालांकि मोहम्मद अबू क़ासिम ग़ाज़ी एक ग़रीब ही व्यक्ति हैं जिनका कारोबार सिर्फ़ मछली बेचना है। लेकिन इनकी ईमानदारी देखने के बाद ये ही कहा जा सकता है कि ईमानदारी की भावना का अमीरी या ग़रीबी से कोई संबंध नहीं है। (Honest Fisherman,News In Hindi)

Farhad Pundir,Farmat
रिपोर्ट : फ़रहाद पुण्डीर (फ़रमात)

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Author: Desh Duniya Today [Farhad Pundir]