Media Brainstorm: हिन्दुस्तानी मीडिया को आख़िर कब ग़ैरत आयेगी? महाराष्ट्र में उद्धव की सरकार गिरने पर जश्न मनाया तो अब बिहार के घटनाक्रम पर विलाप क्यों?

Media Brainstorm: हिन्दुस्तानी मीडिया को आख़िर कब ग़ैरत आयेगी? महाराष्ट्र में उद्धव की सरकार गिरने पर जश्न मनाया तो अब बिहार के घटनाक्रम पर विलाप क्यों?

 

सहारनपुर: Media Brainstorm-
महाराष्ट्र में उद्धव ठाकरे की सरकार गिरने पर जश्न मनाने वाली मीडिया बिहार की सरकार बदलने पर सदमे की हालत में है। कुछ दिनों पहले के तमाम हिंदी अख़बार और तक़रीबन सभी न्यूज़ चैनलों की रिपोर्ट अगर देखी जाए तो उद्धव ठाकरे को छोड़कर अपने विधायकों के साथ भाजपा की गोद मे बैठने वाले शिंदे को राष्ट्रीय हीरो की तरह पेश किया जा रहा था और हिंदुत्व के ठेकेदार रहे शिवसेना प्रमुख को विलेन बना कर देशभर में उनकी छवि को धूमिल कर दी गई थी।

लेकिन आज जब वही सब बिहार में दोहराया गया तो अब तक विकास पुरुष की संज्ञा वाले नीतीश को पलटू राम का तमग़ा देती मीडिया की शर्म और ग़ैरत किसी गंदी जगह पर दफ़न होती नज़र आ रही थी। हैरत होती है भारतीय मीडिया पर कि आख़िर सत्ता से सवाल पूछने का जो हक़ होता है उसको मीडिया विपक्ष को गालियां देने और उसके विरोध प्रदर्शनों को ग़ैर वाजिब करार देने में कैसे बदल दिया गया है।

जब भाजपा के बड़े लीडर कॉंग्रेस नेताओ को गालियां देते हैं उनको देशद्रोही बताते हैं उनकी महिला नेताओं के बारे में घृणित कमेंट करते हैं तो उसको अख़बार चटखारे लगाकर छापता है न्यूज़ चैनल उनपर बड़े लंबे लंबे प्रोग्राम दिखाता है मगर जब विपक्ष भाजपा नेताओं पर कोई आरोप लगाता है तो उसको ऐसे पेश किया जाता है जैसे विपक्ष ने किसी के धर्म के बारे में अपशब्द बोल दिया हो। (Media Brainstorm)

जिस मीडिया को हक़ हासिल है कि वो प्रधानमंत्री से आमने सामने बैठकर विकास पर सवाल करे बेरोज़गारी पर सवाल करे युवाओ के भविष्य पर सवाल करे उनके द्वारा किये गए उन चुनावी वादों पर सवाल करे जो उन्होंने चुनाव प्रचार में किये थे मगर पूरे नही किये गए मगर मीडिया सवाल करता है कि आप आम चूसकर खाते हैं या छीलकर खाते हैं,आप कितने घण्टे सोते हैं आप अपनी एनर्जी बढ़ाने के लिए कौनसा टॉनिक इस्तेमाल करते हैं आप जेब मे पर्स रखते हैं या नही?

यह वो सवाल हैं जो बेशर्म मीडिया पूछती है प्रधानमंत्री से और विपक्ष से यही मीडिया सवाल करती है कि आप प्रधानमंत्री का विरोध कियूं करते हैं विरोध प्रदर्शन कियूं करते हैं,जो भी प्रधानमंत्री या भाजपा का विरोध करता है उसको भारतीय मीडिया पप्पू साबित कर देती है और उसका सबसे बेहतरीन उदाहरण राहुल गांधी है,जिस राहुल गांधी ने विदेशों से शिक्षा हासिल की है उसको पप्पू बना दिया गया है मगर प्रधानमंत्री की डिग्री पर सवाल करने की जुर्रत पालतू मीडिया कभी नही कर पाती। (Media Brainstorm)

इन सब से से हटकर अगर कुछ मीडिया हाउस या कोई पत्रकार सवाल उठाने की जुर्रत कर लेता है तो उसके पीछे तमाम सरकारी एजेंसियों को लगा दिया जाता है, अगर ऐसा कोई पत्रकार किसी अखबार या मीडिया हाउस में काम जर रहा होता है तो उसकी नौकरी खत्म करवा दी जाती है और जिनके पीछे कोई मजबूत हाथ नही होता उनको तमाम आरोप लगाकर जेल भेज दिया जाता है। देश मे मीडिया और पत्रकार का मतलब अब भाजपाई संदेश देने वाला हो गया है और जो भी पत्रकार इस लीक और परिपाटी से हटकर सच सामने लाना चाहता है वो देशद्रोही करार दिया जा सकता है।

बड़ा सवाल यही है कि महाराष्ट्र में अगर सरकार गिराई जा रही थी तो मीडिया को ये हक किसने दिया कि वो जश्न मनाएं खुशियां मनाएं और अगर सरकार बिहार में गिर रही है तो फिर विधवा विलाप कर रही मीडिया पर तरस तो आता ही है,दिन रात मोदी का महिमामंडन कर रही मीडिया पर अब सवाल उठ रहे हैं और दुनिया भर में उठ रहे हैं और वर्ल्ड रैंकिंग में भारतीय मीडिया का गिरता स्तर और स्थान इसका गवाह है। (Media Brainstorm)

जब तक शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे भाजपा के साथ गठबंधन में रहे तो उनको हिंदुत्व का मजबूत ठेकेदार बता रही थी यही मीडिया और जब भाजपा से अलग होकर दूसरे दलों के साथ उन्होंने सरकार बना ली तो उनके बारे में जितना कीचड़ मीडिया ने उछाला वो किसी से छुपा हरगिज़ नही है,वही सब अब बिहार में चलेगा और नीतीश कुमार के बारे में तमामतर खबरें ऐसी दिखाई जाएगी कि उनको शोले का गब्बर सिंह बना दिया जाएगा। (Media Brainstorm)

देश में जो भी व्यक्ति या संस्था या फिर राजनीतिक दल मोदी या फिर भाजपा का विरोध करेगा उसको यही मीडिया देशद्रोही साबित करने में कोई कसर बाकी नही छोड़ेंगी और कोई कितना भी बड़ा माफिया भाजपा की शरण मे चला जायेगा तो उसके सात खून माफ़ कर देगी मीडिया,समय समय पर सुप्रीम अदालतों ने भी इसपर काफ़ी कुछ बोला है मगर अफसोस अब तक मीडिया ने उन चीज़ों पर कतई तवज्जो नही दी जो उसके बारे में बोली गई हैं। (Media Brainstorm)

मीडिया को लोकतंत्र का चौथे खम्बे का दर्जा दिया गया है मगर अफसोस अब ये खम्बा सड़ चुका है जर्जर हो चुका है और गिरने की कगार पर खड़ा है, अभी भी समय है कि मीडिया अपनी खोई हुई प्रतिष्ठा को गंवाने से बचाने के लिए ईमानदारी से कोशिश करे और अपने खोये हुवे वक़ार को दुबारा हासिल करे। (Media Brainstorm)

सरकार से विपक्ष की तरह सवाल करे और सरकार की आंखों में आंखे डालकर उनका जवाब लेने की हिम्मत भी पैदा करे मगर हाल फिलहाल ऎसी कोई उम्मीद नज़र बिल्कुल भी नज़र नही आती,एक शेर आज की मीडिया पर मौज़ू नज़र आता है।
आलेख: फ़ैसल ख़ान (वरिष्ठ पत्रकार एवं सामाजिक चिंतक)

Faisal khan,Media Brainstorm
फ़ैसल ख़ान- वरिष्ठ पत्रकार व सामाजिक चिन्तक

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Author: Desh Duniya Today [Farhad Pundir]