UP Police Fake Encounter: फ़र्ज़ी एनकाउंटर मामले में एटा पुलिस के 9 पुलिस कर्मियों को CBI ने पाया दोषी, 16 साल पहले एक निर्दोष मजदूर का किया था फ़र्ज़ी एनकाउंटर

UP Police Fake Encounter: फ़र्ज़ी एनकाउंटर मामले में एटा पुलिस के 9 पुलिस कर्मियों को CBI ने पाया दोषी, 16 साल पहले एक निर्दोष मजदूर का किया था फ़र्ज़ी एनकाउंटर

 

 

ग़ाज़ियाबाद: UP Police Fake Encounter- उत्तर प्रदेश की पुलिस और सरकार राज्य में क़ानून व्यवस्था बनाने के लिये अपराधियों के एनकाउंटर करने के मामले में जानी जाती है, लेकिन सारे ही एनकाउंटर सही हों ये ज़रूरी नहीं हो सकता। ऐसा ही एक एन्काउन्टर हुआ था 16 साल पहले जब एटा में एक कारपेंटर का काम करने वाले निर्दोष बढ़ई राजाराम को एटा पुलिस ने अपराधी मानकर उसका एनकाउंटर कर दिया था।

मामले की जाँच CBI तक पहुँची और अब 16 साल बाद CBI के विशेष न्यायाधीश प्रवेन्द्र कुमार शर्मा ने ग़ाज़ियाबाद में 16 साल पहले हुए फर्नीचर का काम करने वाले मजदूर राजाराम की हत्या पर अपना निर्णय सुना दिया है। इस मामले में CBI की जाँच के बाद फ़र्ज़ी एनकाउंटर करने वाले पुलिसकर्मियों को ग़ाज़ियाबाद CBI कोर्ट के जज प्रवेन्द्र कुमार ने दोषी क़रार दे दिया है। (UP Police Fake Encounter)UP Police Fake Encounter

जानिये मामला था क्या?
दरअसल एटा पुलिस के कुछ पुलिसकर्मियों पर आरोप था कि उन्होंने एटा के सिढ़पुरा के वाले कारपेंटर मजदूर राजाराम को बेबुनियाद आरोप में गिरफ़्तार कर फ़र्ज़ी तरीक़े से उसका एनकाउंटर कर दिया था। यह मामला है आज से 16 साल पहले वर्ष-2006 का जब एक सिपाही राजेन्द्र ने मजदूर कारपेंटर राजाराम से पहले अपने घर की रसोई में फर्नीचर का काम करवाया, फ़िर मजदूरी का पैसा देने से इनकार कर दिया। (UP Police Fake Encounter)

लेकिन मजदूर राजाराम अपनी की हुई मजदूरी के पैसे लेने लेने पर अड़ गया। सिपाही राजेन्द्र ने अपना पुलिस में होने का रोब दिखाते हुए अपने थाने के दूसरे पुलिस कर्मियों के साथ मिलकर मजदूर राजाराम के एनकाउंटर करने की साजिश रचते हुए मजदूर राजाराम को गिरफ़्तार कर उस पर लूट का झूठा मुक़दमा लगाकर लुटेरा घोषित कर दिया। और उसके बाद उसका फ़र्ज़ी एनकाउंटर कर दिया। (UP Police Fake Encounter)

मामला कोर्ट तक पहुँचा और इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने इस मामले की CBI जाँच कराने का आदेश दे दिया। इस मामले पर वर्ष-2009 में कोर्ट में एक आरोप पत्र दाख़िल किया गया। इसके बाद इस मामले की लगभग 13 वर्षों तक अदालत में सुनवायी चली, जिसमें कुल 202 लोगों की गवाही होने के बाद सिद्ध हुआ कि वास्तव में एटा पुलिस ने मजदूर राजाराम को झूठे आरोप में एनकाउंटर कर हत्या कर दी थी। (UP Police Fake Encounter)

राजाराम की पत्नी संतोष कुमारी ने ग़ाज़ियाबाद CBI अदालत को बताया था जब अगस्त 2006 में पुलिस कर्मी उसके पति को झूठे आरोपों में उठाने आये तो वे अपने परिवार के साथ अपनी बीमार बहन को देखने जा रहे थे। राजाराम की पत्नी संतोष ने बताया कि उसने अपने पति राजाराम को छुड़ाने की बहुत कोशिश की, परन्तु पुलिस कर्मी यह कहकर उसके पति को उठा ले गये कि सिर्फ़ पूछताछ के लिये ले जा रहे हैं। (UP Police Fake Encounter)Ghaziabad Police Fake Encounter

लेकिन 8 अगस्त 2006 को थाना सिढ़पुरा पुलिस ने मुठभेड़ में एक लुटेरे के मारे जाने की ख़बर बतायी तो लुटेरे की शिनाख़्त उसके पति राजाराम के रूप में हुई। जबकि मजदूर राजाराम का इतिहास खंगाला गया तो उस पर इस फ़र्ज़ी मुक़दमे के अलावा कहीं भी किसी भी थाने में कोई केस दर्ज नहीं मिला था। अब मजदूर राजाराम के पीड़ित पिता ने दोषी पुलिस कर्मियों को फाँसी की सज़ा देने की माँग की है।
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Author: Desh Duniya Today [Farhad Pundir]